तेरी आँखों मे आज ये नमी कैसी ?
तेरे हक़ में तो पूरा आसमान है ना,
तो ये अफसोस करने के लिए ,
मुट्ठी भर जमी कैसी ?
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तेरे कदमो में कल से ज्यादा छाले है,
तूने अपने हर डगमगाते कदम संभाले है,
तो क्या हुआ जो मंजिले थोड़ी कठिन है,
तेरे हौसलो ने भी तो अपने होश संभाले है ।
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तेरी आँखों मे ये जीत की प्यास बाकी है,
तेरे जीवन मे हार की खट्टास बाकी है,
तेरी हार जीत के सिलसिलों में, कुछ नया करने का अहसास बाकी है,
तेरी टूटती हुई उममीद में भी, कुछ कर गुज़रने की आस बाकी है ।
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यूँ तोड़ने को तो सारा जमाना आता है,
पर तुझसे जुड़ने भी तो चंद कारवाँ आता है,
के इस टूट के जुड़ने के सफर को यूं ज़ाया मत कर,
मेहनत सच्ची है ,तो यूं नाकामयाबियों से घबराया मत कर ।