हाँ, मेरा यार था वो,
.
मेरी स्कूटी के पीछे बैठने वाला,
मेरे हर बार गिरने पे मुझे उठाने वाला,
डगमगाती स्कूटी से लेकर मेरे डगमगाते रिश्तो को सम्भाल लेने वाला,
मेरी दोस्ती का कर्जदार था वो!
हाँ, मेरा यार था वो ।
.
.
मेरी एक झलक पाने के लिए, झट्ट से मेरे घर के बाहर आ जाना,
ये सुनते ही मेरा नंघे पाव बालकनी में भाग जाना,
उसका मुझे देख कर यूँ हल्के से मुस्कुराना,
और मेरा उसे जाते देख जोरो से हाथ हिलाना,
मेरी हर मुलाकात पे लगने वाला चार चांद था वो!
हाँ, मेरा यार था वो ।
.
.
मेरी हर एक कहानियो को बिना कुछ बोले सुनने वाला,
मेरी हर सुबह को बातों में उलझा कर शाम कर देने वाला,
मेरे हर एक बचपने को समझदारी से सम्भाल लेने वाला,
और मेरी हर परेशानियो को अपना बना के सही कर देना,
मेरे हर किस्सों का एक मात्र किरदार था वो !
हाँ, मेरा यार था वो ।
.
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मेरे चेहरे पे वो मुस्कान लाता था, और उसकी आँखों से मैं नमी चुराती थी,
मैं नाव तो वो मेरी पतवार,
और हमारी दोस्ती की नाव को मजधार पे लगाने वाला एक मात्र नौका था वो !
हाँ, मेरा यार था वो ।
.
गुम है कुछ सालों,
ना मुझे खोया है, ना मुझे ढूढ़ पा रहा है,
दिख जाता है कभी कभी, बस अब देखता नहीं,
मेरे बचपन की कहानियों से लेकर मेरे बुढापे तक का किस्सा बनने वाला,
एक मात्र मेरे जीवन का गुम हुआ हिस्सा है वो !
हाँ, मेरा यार था वो ।
.
.
खुश है अपनी जिंदगी के धागे को पिरोने में, वो धागा जो कभी मेरे दिल से उसके दिल तक एक दूसरे को जोड़ता था,
आज किसी गाँठ में उलझ चुका है, शायद अब सुलझना भी नही चाहता ,
मेरी हर उलझन का एक मात्र सुलझन था वो !
हाँ, मेरा यार था वो ।
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मेरी स्कूटी के पीछे बैठने वाला,
मेरे हर बार गिरने पे मुझे उठाने वाला,
डगमगाती स्कूटी से लेकर मेरे डगमगाते रिश्तो को सम्भाल लेने वाला,
मेरी दोस्ती का कर्जदार था वो!
हाँ, मेरा यार था वो ।
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मेरी एक झलक पाने के लिए, झट्ट से मेरे घर के बाहर आ जाना,
ये सुनते ही मेरा नंघे पाव बालकनी में भाग जाना,
उसका मुझे देख कर यूँ हल्के से मुस्कुराना,
और मेरा उसे जाते देख जोरो से हाथ हिलाना,
मेरी हर मुलाकात पे लगने वाला चार चांद था वो!
हाँ, मेरा यार था वो ।
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मेरी हर एक कहानियो को बिना कुछ बोले सुनने वाला,
मेरी हर सुबह को बातों में उलझा कर शाम कर देने वाला,
मेरे हर एक बचपने को समझदारी से सम्भाल लेने वाला,
और मेरी हर परेशानियो को अपना बना के सही कर देना,
मेरे हर किस्सों का एक मात्र किरदार था वो !
हाँ, मेरा यार था वो ।
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मेरे चेहरे पे वो मुस्कान लाता था, और उसकी आँखों से मैं नमी चुराती थी,
मैं नाव तो वो मेरी पतवार,
और हमारी दोस्ती की नाव को मजधार पे लगाने वाला एक मात्र नौका था वो !
हाँ, मेरा यार था वो ।
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गुम है कुछ सालों,
ना मुझे खोया है, ना मुझे ढूढ़ पा रहा है,
दिख जाता है कभी कभी, बस अब देखता नहीं,
मेरे बचपन की कहानियों से लेकर मेरे बुढापे तक का किस्सा बनने वाला,
एक मात्र मेरे जीवन का गुम हुआ हिस्सा है वो !
हाँ, मेरा यार था वो ।
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खुश है अपनी जिंदगी के धागे को पिरोने में, वो धागा जो कभी मेरे दिल से उसके दिल तक एक दूसरे को जोड़ता था,
आज किसी गाँठ में उलझ चुका है, शायद अब सुलझना भी नही चाहता ,
मेरी हर उलझन का एक मात्र सुलझन था वो !
हाँ, मेरा यार था वो ।


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