कुछ दिनों बाद तुम मुझसे मिलने आना,
मुलाकात होगी हमारी उसी कैफ़े में जहा हमने आखिरी बार एक दूसरे को पूरे हक से अपना बताया था. इस बार , हमेशा से मेरी देर से पहुँचने वाली परम्परा को मैं बदल दूँगी,
हाँ, जिंदगी में पहली बार और शायद आखिरी बार , मैं तुमसे और वक़्त, दोनो से पहले पहुँच जाऊँगी.
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हातो में फ़ोन लिए, दिल में अजीब सा दर्द लिए, आँखों मे तुम्हारा इन्तेजार लिए, उस कोने वाले सोफ़े पे बैठी रहूंगी (अरे वही सोफा जहा हम दोनों हमेशा बैठा करते थे).
और फिर अचानक से तुम्हारे आने की आहट उठेगी,
मेरी धड़कन , उन पटरियो पे चलने वाली ट्रेन से भी ज्यादा तेज हो चुकि होंगी.
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मैं सिर्फ तुम्हे आता नहीं देखूँगी, तूम्हारे साथ आएगा मेरा कुछ सालों के इंतजार,
मेरा एक सपना जो मै खुली आँखों से पूरा होते देखूँगी.
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तुम बैठोगे मेरे सामने ,
हम हाथ मिलाएंगे, पर नजरे मिलाना थोड़ा मुश्किल होगा.
हाल चाल से परे हट कर हम आएंगे अपनी बातों पर,
मैं बताऊंगी की -
कितना मुश्किल था तुम्हारे बिना रहना, जैसे किसी मुसाफिर से उसका घर छीन लिया हो,
कैसे मैं हर रात तुझे याद करती थी, पर कभी रोती नही थी,(हाँ, नही रोती मैं आसानी से)
कैसे तुझे ऑनलाइन देख कर, मेरी उंगलियां खुद ही तुझे मैसेज करने दौड़ जाया करती थी, (हाँ, पर मैंने नही किया मैसेज, या शायद कर नही पायी ).
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पर आज तुझसे कुछ शिकायत नही है,
ना मेरे दिल मे तेरे लिए कोई मलाल,
मैं समझ चुकी होंगी की - तू मेरी जिंदगी की किताब का सिर्फ एक पन्ना था, और मैं जबरदस्ती तुझे पूरी किताब बनाना चाहती थी,
हाँ, उस किताब के चक्कर में मैंने खुद से ज्यादा तुझे परेशान किया था.
खैर, वो पन्ना मेरी किताब का सबसे खूबसूरत पन्ना रहेगा,
बस गम इतना रहेगा की, हम उस एक पन्ने को आखिर तक पूरा नही कर पाए,
हमारे पन्ने की शुरुआत जितनी प्यारी थी, अंत उतना ही बुरा हुआ.
पर कुछ चीजों का बस हमारे हाथ मे नही होता,
इसका ये मतलब नहीं, की वो चीज हमारी नही होती.
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इस बार हम खुल के बात करेंगे, ना मैं बातें बनाऊंगी, ना तुम ताने कसोगे,
एक नई शुरुआत होगी हमारे रिश्ते की
(नही , नही , वो नही जो आप सोच रहे है, अब हम साथ नही आएंगे)
अब रिश्ता बनेगा तो फ़िर से उन दो अंजानो का,
वो अंजान जो बहुत खुश थे अपने जीवन मे , एक दूसरे के बिना.
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मैं उस दिन रिहा कर दूँगी तुझे-
हर उस बोझ से , जिसने तुझे अब तक पीछे खींचा था,
उस हर इल्जामों से, जिसने तुझे लोगों की नजरो में गुनहगार
बनाया था,
और बस एक आखिरी बार , तुझे अलविदा कहूँगी,
इस बार चेहरे पे मुस्कान पहले से भी बड़ी होगी,
हाँ, आँखों में आँसू जरूर होंगे, पर इस बार खशी के ।